Untitled by Ashok Chakradhar एक गुमसुम मैना है अकेले में गाती है राग बागेश्री । तोता उससे कहे कुछ सुनाओ तो ज़रा तो चोंच चढ़ाकर कहती है फिर कभी गाऊँगी जी । Rate this poem: Report SPAM Reviews Post review No reviews yet. Report violation Log in or register to post comments